हम दिनभर दूसरों से तो प्यार से बात करते हैं...
लेकिन अपने आप से?
"मैं बेकार हूँ।"
"मैं कभी सफल नहीं हो पाऊँगा।"
"मुझसे कुछ नहीं होगा।"
क्या आपने महसूस किया है कि सबसे कठोर शब्द हम अक्सर खुद के लिए ही इस्तेमाल करते हैं?
उपनिषद क्या कहते हैं?
उपनिषदों का महान वाक्य है—
"अहम् ब्रह्मास्मि"
इसका अर्थ है—
मेरे भीतर भी वही दिव्यता है जो पूरे ब्रह्मांड में है।
इसका मतलब अहंकार नहीं, बल्कि आत्मसम्मान है।
खुद से नफ़रत क्यों नहीं करनी चाहिए?
अगर आप हर दिन खुद को अपमानित करते हैं, तो धीरे-धीरे आपका मन भी उन बातों पर विश्वास करने लगता है।
यही नकारात्मक सोच आत्मविश्वास को कम करती है और जीवन में आगे बढ़ने से रोकती है।
आज से एक नई आदत
रोज़ सुबह आईने में देखकर सिर्फ एक वाक्य बोलिए—
"मैं सक्षम हूँ। मुझमें ईश्वर का अंश है।"
शुरुआत में अजीब लगेगा।
लेकिन यही छोटा-सा अभ्यास आपके आत्मविश्वास को बदल सकता है।
याद रखिए—
दूसरों से सम्मान पाने से पहले,
खुद को सम्मान देना सीखिए।
क्योंकि...
जिस व्यक्ति को अपनी कीमत पता होती है, दुनिया भी उसकी कीमत समझती है।
🌸 Seekh Sanatan Ki, Baat Aaj Ki.
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