Saturday, June 27, 2026

डर पर जीत कैसे पाएं? भक्त प्रह्लाद की कहानी आज भी हमें क्या सिखाती है


क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा डर है जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है?

शायद असफल होने का डर... शायद लोगों के क्या कहेंगे का डर... या फिर सब कुछ खो देने का डर...

सनातन परंपरा में भक्त प्रह्लाद की कथा केवल भक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि साहस की भी कहानी है।

प्रह्लाद को डर क्यों नहीं लगा?

हिरण्यकशिपु ने उन्हें अनेक कष्ट दिए, लेकिन प्रह्लाद का विश्वास नहीं डगमगाया।

उनकी शक्ति यह थी कि उन्होंने अपना जीवन भगवान को समर्पित कर दिया था।

जब मन यह स्वीकार कर लेता है कि "मैं अपना कर्म करूँगा, परिणाम भगवान पर छोड़ता हूँ," तब डर का प्रभाव कम होने लगता है।

डर का असली कारण

अक्सर डर किसी घटना से नहीं, बल्कि हमारी कल्पना से पैदा होता है।

हम सोचते हैं—

"अगर ऐसा हो गया तो?"

यही सोच हमें रोक देती है।

आज का अभ्यास

एक कागज़ लीजिए।

अपने सबसे बड़े डर को लिखिए।

फिर उसके नीचे लिखिए—

"मैं इससे सामना कर सकता हूँ।"

याद रखिए, साहस का मतलब डर का न होना नहीं है।

साहस का मतलब है—डर के बावजूद सही कदम उठाना।

🌸 सीख सनातन की, बात आज की।

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